Saturday, December 27, 2008

"सत्य- कविता"

"दो रुपये के पाँच"

सुबह का समय, पूलिस का जवान
मेरी गाढ़ी मे बेठा श्री मान
सफ़र किया ,किराया दिया
दो-ऱू खुले थे मेरे पास, बोला
तुम बहन..... से ही करते हॉ
मे बोला,सर तलाशी ले लो.....
साले...... ज़ुबान चलाता हे
पाँच मा मेरे लगाए.......
मे मे राम से बोला.......
क्या कसूर मेरा जो पिटवाया.......
मे गाढी से बाहर आया...
पूलिस वाले को एक पंच लगाया
वो नीचे ज़मीन आया
मे राम से बोला प्रभु कमाल ......
बोले ...नही ये तेरा किया .....
अगर मे करता तो यह जिंदा होता....
इतने मे एक रिक्शा वाला बोला भा....
कोई और पूलिस वाला आया तो पीट जाएगा
मे ....गोली.... राम बोले सत की कमाई...
अब समझ मे आई.... हराम की खाने वाले
कभी सत के सामने ....जीत पाएँगे
तेरे को मारने से पहले राम.........मे बोला नही....प्रभु

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