कश्मीर से शिव भक्त ,नगन रहयी थी.
पूछा क्यों रहती हो......तो तीखे स्वर मैं बोली क्यों ना रहूं
मुझे तो आस पास कोई मर्द नही दिखाई देता.
...............दुख का कोंन सा विष मैने नही पिया ?
अनगणित जीवन-मृतयूके फेरो मैं अपने
आह...श्वास नियमन से पिए जाने वाले
मेरे पयाले मैं,अब अमृत के सिवा कुछ भी नही.....
अनुवाद योग नन्दा परम हंस
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