"जब अज्ञान के कारन द्वेत भावः रहता है ,तब सब कुछ आत्मा से अलग दिखाई देता है।
जब यह ज्ञान हो जाता है कि सब कुछ आत्मा ही है ,तब एक अनु भी आत्मा से अलग
दिखाई नही देता । सत्य का ज्ञान पर्कट होते ही शरीर के मिथ्यातव के कारन हुए
कर्मो के फल भोगने के लिए शेष नही रह सकते ,जेसे जागने पर स्वपन का अस्तित्व
नही रहता । आदि शंकराचार्य
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