Saturday, December 27, 2008

"शासन"

खड़ी हो गई चाँपकर कंकालों की हूक

नभ में विपुल विराट-सी शासन की बंदूक

उस हिटलरी गुमान पर सभी रहें है थूक

बढ़ी बधिरता दसगुनी, बने विनोबा मूक

धन्य-धन्य वह, धन्य वह, शासन की बंदूक
नागार्जुन

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